भूकंप नहीं आया, लेकिन हिली धरती... हैदराबाद में हैरतअंगेज घटना, NGRI ने जो बताया, नहीं होगा यकीन
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के गाजूलारामाराम और मटका गुडेम इलाकों में आज मंगलवार (10 फरवरी, 2026) को सुबह करीब 10:10 बजे लोगों को तेज झटके महसूस हुए. इन झटकों को शुरुआत में भूकंप की आहट समझा गया. हालांकि, CSIR-NGRI के निदेशक डॉ. प्रकाश कुमार ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए भूकंपीय गतिविधि का कोई सबूत नहीं है. उन्होंने कहा कि यह झटका प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित है, जो आस-पास के निर्माण स्थलों पर चट्टानों को ब्लास्टिंग से तोड़ने के कारण हुआ है. मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि कैसे भारी शोर के साथ जमीन कांपने लगी, जिससे इलाके के कई गेटेड कम्युनिटी और अपार्टमेंट्स के निवासी दहशत में घरों से बाहर भागे. लोगों की नजरों में डर और असमंजस साफ दिख रहा था. कई लोगों ने बताया कि उन्हें लगा कि कोई विशाल विस्फोट हुआ है, लेकिन जब डॉ. प्रकाश कुमार की प्रतिक्रिया सामने आई, तो पूरा मामला साफ हो गया. उन्होंने कहा कि सीस्मोग्राफ पर कोई भी भूकंपीय तरंग दर्ज नहीं हुई, जो यह साबित करता है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि धरती के नीचे हुई ब्लास्टिंग का नतीजा है. बीते सालों में बढ़े चट्टानों को तोड़ने के मामले दरअसल, पिछले कुछ सालों में हैदराबाद के उपनगरीय इलाकों, खासकर मेडचल जिले में तेजी से शहरीकरण हुआ है. बड़े पैमाने पर ऊंची इमारतें बनाने के लिए जमीन के अंदर मौजूद चट्टानों को तोड़ने के लिए भारी मात्रा में विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अवैध खनन और बिना मानकों के की जाने वाली ब्लास्टिंग के मामले बढ़ने से आम जनजीवन में खतरा बढ़ रहा है. ब्लास्ट की जगह तलाश रहे अधिकारी यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है, लेकिन आज का डर इतना गहरा था कि लोग घंटों तक सड़कों पर ही रहे. अधिकारी अभी मामले की तफ्तीश में जुटे हैं कि आखिर किस स्थान पर यह ब्लास्टिंग की गई और क्या इसके लिए अनुमति ली गई थी. फिलहाल, लोगों में डर का माहौल है और वे सरकार से आश्वासन की मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के गाजूलारामाराम और मटका गुडेम इलाकों में आज मंगलवार (10 फरवरी, 2026) को सुबह करीब 10:10 बजे लोगों को तेज झटके महसूस हुए. इन झटकों को शुरुआत में भूकंप की आहट समझा गया. हालांकि, CSIR-NGRI के निदेशक डॉ. प्रकाश कुमार ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए भूकंपीय गतिविधि का कोई सबूत नहीं है. उन्होंने कहा कि यह झटका प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित है, जो आस-पास के निर्माण स्थलों पर चट्टानों को ब्लास्टिंग से तोड़ने के कारण हुआ है.
मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि कैसे भारी शोर के साथ जमीन कांपने लगी, जिससे इलाके के कई गेटेड कम्युनिटी और अपार्टमेंट्स के निवासी दहशत में घरों से बाहर भागे. लोगों की नजरों में डर और असमंजस साफ दिख रहा था. कई लोगों ने बताया कि उन्हें लगा कि कोई विशाल विस्फोट हुआ है, लेकिन जब डॉ. प्रकाश कुमार की प्रतिक्रिया सामने आई, तो पूरा मामला साफ हो गया.
उन्होंने कहा कि सीस्मोग्राफ पर कोई भी भूकंपीय तरंग दर्ज नहीं हुई, जो यह साबित करता है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि धरती के नीचे हुई ब्लास्टिंग का नतीजा है.
बीते सालों में बढ़े चट्टानों को तोड़ने के मामले
दरअसल, पिछले कुछ सालों में हैदराबाद के उपनगरीय इलाकों, खासकर मेडचल जिले में तेजी से शहरीकरण हुआ है. बड़े पैमाने पर ऊंची इमारतें बनाने के लिए जमीन के अंदर मौजूद चट्टानों को तोड़ने के लिए भारी मात्रा में विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अवैध खनन और बिना मानकों के की जाने वाली ब्लास्टिंग के मामले बढ़ने से आम जनजीवन में खतरा बढ़ रहा है.
ब्लास्ट की जगह तलाश रहे अधिकारी
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है, लेकिन आज का डर इतना गहरा था कि लोग घंटों तक सड़कों पर ही रहे. अधिकारी अभी मामले की तफ्तीश में जुटे हैं कि आखिर किस स्थान पर यह ब्लास्टिंग की गई और क्या इसके लिए अनुमति ली गई थी. फिलहाल, लोगों में डर का माहौल है और वे सरकार से आश्वासन की मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
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