बढ़ती गर्मी का कहर अब मां की कोख तक, जानिए भ्रूण पर कैसे पड़ रहा है तापमान का असर?
Climate Change and Pregnancy: जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं रही, यह स्वास्थ्य, जीवनशैली और यहां तक कि गर्भावस्था को भी प्रभावित कर रही है. दुनिया भर में हो रहे जलवायु परिवर्तन से गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं पर गहरा असर पड़ रहा है. अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण, पानी की कमी और अस्थिर मौसम, ये सभी मातृत्व की राह को कठिन बना रहे हैं. दरअसल, जलवायु परिवर्तन पर शोध और रिपोर्ट करने वाले स्वतंत्र वैज्ञानिकों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी 247 से अधिक देशों में गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तापमान से प्रीमैच्योर डिलीवरी, गर्भपात, भ्रूण के विकास में रुकावट और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. साथ ही मानसिक तनाव, अत्यधिक थकान और नींद की कमी जैसी समस्याएं भी इन महिलाओं को अधिक प्रभावित करती हैं. ये भी पढ़े- कोरोना वायरस से दो लोगों की हुई मौत, भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं केस- ऐसे बरतें सावधानी वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य को लेकर चिंता प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण गर्भवती महिलाओं के फेफड़ों और हृदय पर प्रभाव डालते हैं. रिसर्च बताते हैं कि, ऐसे में शिशु के दिमागी विकास को भी प्रभावित कर सकता है. इसके साथ ही अस्थमा और अन्य सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. मां और बच्चे को बचाकर कैसे रखें? ठंडी जगह पर रहें: गर्मी के समय घर में रहें, एसी या कूलर का उपयोग करें और दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलें. हाइड्रेशन बनाए रखें: खूब पानी, नारियल पानी और नींबू पानी पिएं ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. स्वस्थ खानपान जरूरी है: हल्का, पौष्टिक और ताजा भोजन लें जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे. डॉक्टर से नियमित संपर्क: गर्भावस्था में कोई भी असुविधा या लक्षण नज़र आते ही डॉक्टर से संपर्क करें. प्रदूषण से बचाव: बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें और हरे-भरे स्थानों में ही टहलें. मां बनना एक खूबसूरत अनुभव है, लेकिन जलवायु संकट इस सफर को जोखिमभरा बना रहा है. ऐसे समय में समाज, सरकार और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलकर काम करने की जरूरत है. ताकि हर मां सुरक्षित और स्वस्थ मातृत्व का अनुभव कर सके. जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समझदारी से भी करना होगा. ये भी पढ़ें: युवाओं में तेजी से फैल रही यह बीमारी, 'साइलेंट किलर' की तरह बनाती है शिकार Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Climate Change and Pregnancy: जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं रही, यह स्वास्थ्य, जीवनशैली और यहां तक कि गर्भावस्था को भी प्रभावित कर रही है. दुनिया भर में हो रहे जलवायु परिवर्तन से गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं पर गहरा असर पड़ रहा है. अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण, पानी की कमी और अस्थिर मौसम, ये सभी मातृत्व की राह को कठिन बना रहे हैं.
दरअसल, जलवायु परिवर्तन पर शोध और रिपोर्ट करने वाले स्वतंत्र वैज्ञानिकों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी 247 से अधिक देशों में गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक तापमान से प्रीमैच्योर डिलीवरी, गर्भपात, भ्रूण के विकास में रुकावट और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. साथ ही मानसिक तनाव, अत्यधिक थकान और नींद की कमी जैसी समस्याएं भी इन महिलाओं को अधिक प्रभावित करती हैं.
ये भी पढ़े- कोरोना वायरस से दो लोगों की हुई मौत, भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं केस- ऐसे बरतें सावधानी
वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य को लेकर चिंता
प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण गर्भवती महिलाओं के फेफड़ों और हृदय पर प्रभाव डालते हैं. रिसर्च बताते हैं कि, ऐसे में शिशु के दिमागी विकास को भी प्रभावित कर सकता है. इसके साथ ही अस्थमा और अन्य सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.
मां और बच्चे को बचाकर कैसे रखें?
ठंडी जगह पर रहें: गर्मी के समय घर में रहें, एसी या कूलर का उपयोग करें और दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलें.
हाइड्रेशन बनाए रखें: खूब पानी, नारियल पानी और नींबू पानी पिएं ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो.
स्वस्थ खानपान जरूरी है: हल्का, पौष्टिक और ताजा भोजन लें जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे.
डॉक्टर से नियमित संपर्क: गर्भावस्था में कोई भी असुविधा या लक्षण नज़र आते ही डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रदूषण से बचाव: बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें और हरे-भरे स्थानों में ही टहलें.
मां बनना एक खूबसूरत अनुभव है, लेकिन जलवायु संकट इस सफर को जोखिमभरा बना रहा है. ऐसे समय में समाज, सरकार और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलकर काम करने की जरूरत है. ताकि हर मां सुरक्षित और स्वस्थ मातृत्व का अनुभव कर सके. जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समझदारी से भी करना होगा.
ये भी पढ़ें: युवाओं में तेजी से फैल रही यह बीमारी, 'साइलेंट किलर' की तरह बनाती है शिकार
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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