बजट से उम्मीद: देश की आर्थिक रफ्तार बनाए रखने के लिए संस्थागत सुधार, राजकोषीय मजबूती महत्वपूर्ण

India GDP Growth: उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने आगामी केंद्रीय बजट में संस्थागत सुधारों और राजकोषीय मजबूती पर विशेष जोर देने की आवश्यकता बताते हुए सरकार से देश की आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने का आग्रह किया है. सीआईआई द्वारा भारत की वृहद आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए तैयार की गई रणनीति ऋण स्थिरता, राजकोषीय पारदर्शिता, राजस्व जुटाने और व्यय दक्षता जैसे अहम स्तंभों पर आधारित है. सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत ने उच्च विकास दर, नियंत्रित मुद्रास्फीति और बेहतर राजकोषीय संकेतकों का एक दुर्लभ संतुलन हासिल किया है, जिसे बनाए रखने के लिए फरवरी में पेश होने वाले 2026-27 के केंद्रीय बजट में अनुशासित राजकोषीय प्रबंधन और गहन संस्थागत सुधारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उद्योग मंडल ने कर-जीडीपी अनुपात बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्यों को मिलाकर यह अनुपात लगभग 17.5 प्रतिशत है, जबकि देश की विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसे और बढ़ाना जरूरी है. सीआईआई ने कर चोरी का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक डेटा विश्लेषण तकनीकों, कर रिटर्न को उच्च मूल्य के लेन-देन से जोड़ने और भारत के मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे से प्राप्त आंकड़ों के बेहतर उपयोग की सिफारिश की, जिससे कर आधार का विस्तार होने के साथ-साथ अनुपालन लागत भी कम की जा सके. कर्ज को प्रबंधन योग्य बनाए रखने के लिए सीआईआई ने वित्त वर्ष 2030-31 तक सरकार के कर्ज को जीडीपी के लगभग 50 प्रतिशत तक सीमित रखने की रूपरेखा का पालन करने पर जोर दिया और राजस्व, व्यय व ऋण के लिए तीन से पांच वर्ष का ‘रोलिंग रोडमैप’ अपनाने की सलाह दी, ताकि मध्यम अवधि का राजकोषीय ढांचा मजबूत हो सके. इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता आंकने के लिए एक राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक को संस्थागत रूप देने का सुझाव दिया गया, जिससे बेहतर प्रदर्शन करने वाले और सुधार-उन्मुख राज्यों को प्रोत्साहन मिल सके. सीआईआई ने विनिवेश को लेकर चरणबद्ध रणनीति अपनाने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटाकर पहले 51 प्रतिशत और बाद में 26 से 33 प्रतिशत तक लाने, साथ ही समानांतर रूप से पूर्ण निजीकरण के प्रयास जारी रखने की सिफारिश की. व्यय प्रबंधन के तहत, विशेषकर सब्सिडी सुधार पर जोर देते हुए उद्योग मंडल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी चुनौतियों- जैसे पुराने आंकड़े और कालाबाजारीकी ओर ध्यान दिलाया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता बताई, जिससे बेहतर नतीजों के साथ-साथ वित्तीय बचत भी सुनिश्चित की जा सके.

Dec 25, 2025 - 20:30
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बजट से उम्मीद: देश की आर्थिक रफ्तार बनाए रखने के लिए संस्थागत सुधार, राजकोषीय मजबूती महत्वपूर्ण

India GDP Growth: उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने आगामी केंद्रीय बजट में संस्थागत सुधारों और राजकोषीय मजबूती पर विशेष जोर देने की आवश्यकता बताते हुए सरकार से देश की आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने का आग्रह किया है. सीआईआई द्वारा भारत की वृहद आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए तैयार की गई रणनीति ऋण स्थिरता, राजकोषीय पारदर्शिता, राजस्व जुटाने और व्यय दक्षता जैसे अहम स्तंभों पर आधारित है.

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत ने उच्च विकास दर, नियंत्रित मुद्रास्फीति और बेहतर राजकोषीय संकेतकों का एक दुर्लभ संतुलन हासिल किया है, जिसे बनाए रखने के लिए फरवरी में पेश होने वाले 2026-27 के केंद्रीय बजट में अनुशासित राजकोषीय प्रबंधन और गहन संस्थागत सुधारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

उद्योग मंडल ने कर-जीडीपी अनुपात बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्यों को मिलाकर यह अनुपात लगभग 17.5 प्रतिशत है, जबकि देश की विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसे और बढ़ाना जरूरी है. सीआईआई ने कर चोरी का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक डेटा विश्लेषण तकनीकों, कर रिटर्न को उच्च मूल्य के लेन-देन से जोड़ने और भारत के मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे से प्राप्त आंकड़ों के बेहतर उपयोग की सिफारिश की, जिससे कर आधार का विस्तार होने के साथ-साथ अनुपालन लागत भी कम की जा सके.

कर्ज को प्रबंधन योग्य बनाए रखने के लिए सीआईआई ने वित्त वर्ष 2030-31 तक सरकार के कर्ज को जीडीपी के लगभग 50 प्रतिशत तक सीमित रखने की रूपरेखा का पालन करने पर जोर दिया और राजस्व, व्यय व ऋण के लिए तीन से पांच वर्ष का ‘रोलिंग रोडमैप’ अपनाने की सलाह दी, ताकि मध्यम अवधि का राजकोषीय ढांचा मजबूत हो सके.

इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता आंकने के लिए एक राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक को संस्थागत रूप देने का सुझाव दिया गया, जिससे बेहतर प्रदर्शन करने वाले और सुधार-उन्मुख राज्यों को प्रोत्साहन मिल सके.

सीआईआई ने विनिवेश को लेकर चरणबद्ध रणनीति अपनाने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटाकर पहले 51 प्रतिशत और बाद में 26 से 33 प्रतिशत तक लाने, साथ ही समानांतर रूप से पूर्ण निजीकरण के प्रयास जारी रखने की सिफारिश की.

व्यय प्रबंधन के तहत, विशेषकर सब्सिडी सुधार पर जोर देते हुए उद्योग मंडल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी चुनौतियों- जैसे पुराने आंकड़े और कालाबाजारीकी ओर ध्यान दिलाया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता बताई, जिससे बेहतर नतीजों के साथ-साथ वित्तीय बचत भी सुनिश्चित की जा सके.

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