नेतन्याहू की वापसी मुश्किल! सहयोगियों के बदले सुर, कुंडली ने भी बढ़ाई चिंता

Israel Next Prime Minister: इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें उनके अपने ही गठबंधन ने बढ़ा दी हैं. बहुमत के जरूरी आंकड़े से आठ सीटें दूर खड़े उनके खेमे में उस वक्त दरार आ गई, जब 'यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म' (UTJ) गठबंधन के अहम घटक दल 'डेगेल हतोरा' ने प्रधानमंत्री पद के लिए किसी भी नाम की सिफारिश न करने का ऐलान कर दिया. चार सांसदों वाले इस गुट का यह रुख नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका है. दूसरी ओर, विपक्षी खेमे के नेता गादी आइजेनकोट को अरब दल 'राअम' का साथ मिलने से उनकी स्थिति मजबूत हुई है. इन बनते-बिगड़ते सियासी समीकरणों के बीच ज्योतिषीय संकेत भी सत्ता में भारी उथल-पुथल और नेतृत्व परिवर्तन की ओर इशारा कर रहे हैं. पुराने सहयोगी की नाराजगी और सीटों का गणित डेगेल हतोरा गुट की नाराजगी की मुख्य वजह अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय के पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने वाले कानून पर सहमति न बन पाना है. हालांकि इस गुट ने गठबंधन से अलग होने का औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन समर्थन पर रोक लगाकर नेतन्याहू के लिए अपने सहयोगियों को एकजुट रखना बेहद कठिन बना दिया है. इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में नेतन्याहू के खेमे के पास 53 सीटें हैं, जबकि मुख्य विपक्ष के पास 48 और अरब दलों के पास 19 सीटें हैं. राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग चुनावी नतीजों के बाद सभी दलों से विचार-विमर्श कर रहे हैं, और सरकार बनाने का पहला न्योता उसी नेता को मिलेगा जो संसद में भरोसेमंद और स्थिर संख्याबल दिखा सकेगा. केतु की महादशा और समर्थन पर गहराती अनिश्चितता बेंजामिन नेतन्याहू की जन्मकुंडली वृश्चिक लग्न की है. इसमें लाभ, उपलब्धि और समर्थन के ग्यारहवें भाव में चंद्रमा और बुध के साथ केतु मौजूद है, और वर्तमान में वे केतु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा से गुजर रहे हैं. ग्यारहवें भाव में केतु की स्थिति अंतिम क्षणों में समर्थन के डगमगाने और अनिश्चितता का संकेत देती है. हालांकि अपनी ही राशि कन्या में स्थित बुध बातचीत और राजनीतिक चालों को पूरी तरह विफल नहीं होने देता. वहीं लग्न में बैठे सप्तमेश शुक्र की अंतर्दशा यह दर्शाती है कि कुर्सी बचाने के लिए नेतन्याहू को सहयोगियों की बेहद सख्त शर्तों और भारी राजनीतिक समझौतों के आगे झुकना पड़ सकता है. सत्ता भाव में गुरु और केतु का अवरोध ग्रहों के गोचर के अनुसार हाल ही में गुरु का प्रवेश सिंह राशि में हुआ है, जो नेतन्याहू की कुंडली का दसवां यानी शासन और प्रतिष्ठा का भाव है. दसवें भाव में गुरु का आगमन नए राजनीतिक अवसर, चर्चाएं और समझौते कराने की संभावना दिखाता है. लेकिन इसी राशि में केतु पहले से स्थित है और लग्नेश मंगल के करीब है. मंगल के पास केतु की यह मौजूदगी नेतृत्व और राजनीतिक नियंत्रण में गंभीर व्यवधान पैदा करती है. इसके अलावा गुरु के उच्च राशि कर्क से निकलने के बाद लग्न पर से उनका शुभ प्रभाव हट चुका है, जिससे पहले मिल रहा राजनीतिक संरक्षण अब वैसा नहीं रहा. लाभेश बुध पर शनि की दृष्टि और बातचीत में अड़चनें ग्रहों की स्थिति में एक और बड़ा रोड़ा मीन राशि में वक्री शनि का प्रभाव है, जिनकी सीधी दृष्टि ग्यारहवें भाव के स्वामी कन्या स्थित बुध पर पड़ रही है. ज्योतिषीय में यह स्थिति राजनीतिक बातचीत के लंबे खिंचने, शर्तों के कड़े होने और मनमुताबिक समर्थन मिलने में देरी की ओर इशारा करती है. नेतन्याहू के सामने चुनौती केवल नए सहयोगियों से संपर्क साधने की नहीं, बल्कि उस बातचीत को ठोस समर्थन में तब्दील करने की है. नए साथियों को जोड़ने की होड़ में पुराने साथियों की अनदेखी सत्ता के इस खेल को और ज्यादा उलझा रही है. इजरायल की कुंडली में भी भारी दबाव इजरायल की कन्या लग्न की राष्ट्र कुंडली भी स्थिरता का संकेत नहीं दे रही है. इस कुंडली में गुरु का सिंह राशि में गोचर बारहवें भाव में है, जो पर्दे के पीछे की वार्ताओं, राजनीतिक रियायतों और समझौतों की मजबूरी को दिखाता है. साथ ही सातवें भाव में बैठे शनि की दृष्टि शासन के दसवें भाव पर पड़ रही है, जिससे गठबंधन का दबाव लगातार बना हुआ है. हालांकि राष्ट्र कुंडली के लग्न का अंतिम अंशों पर होना कुछ सीमाओं में बांधता है, फिर भी यह साफ है कि सत्ता का ढांचा इस समय भारी अंतर्विरोधों से जूझ रहा है. वापसी या सत्ता परिवर्तन: क्या कहते हैं समीकरण? जमीनी राजनीति और दोनों कुंडलियों के गोचर को मिलाकर देखें तो नेतन्याहू के लिए दोबारा सरकार बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आता है. गुरु नए सिरे से बात करने का अवसर तो दे रहे हैं, लेकिन केतु और शनि का नकारात्मक प्रभाव उन मौकों को स्थिर समर्थन में बदलने नहीं दे रहा है. वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए उनका दोबारा ताज पहनना मुश्किल लग रहा है और पलड़ा नेतृत्व परिवर्तन की तरफ झुकता दिखाई दे रहा है. अगर वे किसी तरह वापसी का रास्ता निकाल भी लेते हैं, तो यह सरकार बेहद कमजोर नींव और अपमानजनक समझौतों पर ही टिकी रह पाएगी. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Nov 5, 2026 - 16:30
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नेतन्याहू की वापसी मुश्किल! सहयोगियों के बदले सुर, कुंडली ने भी बढ़ाई चिंता

Israel Next Prime Minister: इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें उनके अपने ही गठबंधन ने बढ़ा दी हैं. बहुमत के जरूरी आंकड़े से आठ सीटें दूर खड़े उनके खेमे में उस वक्त दरार आ गई, जब 'यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म' (UTJ) गठबंधन के अहम घटक दल 'डेगेल हतोरा' ने प्रधानमंत्री पद के लिए किसी भी नाम की सिफारिश न करने का ऐलान कर दिया.

चार सांसदों वाले इस गुट का यह रुख नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका है. दूसरी ओर, विपक्षी खेमे के नेता गादी आइजेनकोट को अरब दल 'राअम' का साथ मिलने से उनकी स्थिति मजबूत हुई है. इन बनते-बिगड़ते सियासी समीकरणों के बीच ज्योतिषीय संकेत भी सत्ता में भारी उथल-पुथल और नेतृत्व परिवर्तन की ओर इशारा कर रहे हैं.

पुराने सहयोगी की नाराजगी और सीटों का गणित

डेगेल हतोरा गुट की नाराजगी की मुख्य वजह अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय के पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने वाले कानून पर सहमति न बन पाना है. हालांकि इस गुट ने गठबंधन से अलग होने का औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन समर्थन पर रोक लगाकर नेतन्याहू के लिए अपने सहयोगियों को एकजुट रखना बेहद कठिन बना दिया है.

इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में नेतन्याहू के खेमे के पास 53 सीटें हैं, जबकि मुख्य विपक्ष के पास 48 और अरब दलों के पास 19 सीटें हैं. राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग चुनावी नतीजों के बाद सभी दलों से विचार-विमर्श कर रहे हैं, और सरकार बनाने का पहला न्योता उसी नेता को मिलेगा जो संसद में भरोसेमंद और स्थिर संख्याबल दिखा सकेगा.

केतु की महादशा और समर्थन पर गहराती अनिश्चितता

बेंजामिन नेतन्याहू की जन्मकुंडली वृश्चिक लग्न की है. इसमें लाभ, उपलब्धि और समर्थन के ग्यारहवें भाव में चंद्रमा और बुध के साथ केतु मौजूद है, और वर्तमान में वे केतु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा से गुजर रहे हैं. ग्यारहवें भाव में केतु की स्थिति अंतिम क्षणों में समर्थन के डगमगाने और अनिश्चितता का संकेत देती है.

हालांकि अपनी ही राशि कन्या में स्थित बुध बातचीत और राजनीतिक चालों को पूरी तरह विफल नहीं होने देता. वहीं लग्न में बैठे सप्तमेश शुक्र की अंतर्दशा यह दर्शाती है कि कुर्सी बचाने के लिए नेतन्याहू को सहयोगियों की बेहद सख्त शर्तों और भारी राजनीतिक समझौतों के आगे झुकना पड़ सकता है.

सत्ता भाव में गुरु और केतु का अवरोध

ग्रहों के गोचर के अनुसार हाल ही में गुरु का प्रवेश सिंह राशि में हुआ है, जो नेतन्याहू की कुंडली का दसवां यानी शासन और प्रतिष्ठा का भाव है. दसवें भाव में गुरु का आगमन नए राजनीतिक अवसर, चर्चाएं और समझौते कराने की संभावना दिखाता है. लेकिन इसी राशि में केतु पहले से स्थित है और लग्नेश मंगल के करीब है.

मंगल के पास केतु की यह मौजूदगी नेतृत्व और राजनीतिक नियंत्रण में गंभीर व्यवधान पैदा करती है. इसके अलावा गुरु के उच्च राशि कर्क से निकलने के बाद लग्न पर से उनका शुभ प्रभाव हट चुका है, जिससे पहले मिल रहा राजनीतिक संरक्षण अब वैसा नहीं रहा.

लाभेश बुध पर शनि की दृष्टि और बातचीत में अड़चनें

ग्रहों की स्थिति में एक और बड़ा रोड़ा मीन राशि में वक्री शनि का प्रभाव है, जिनकी सीधी दृष्टि ग्यारहवें भाव के स्वामी कन्या स्थित बुध पर पड़ रही है. ज्योतिषीय में यह स्थिति राजनीतिक बातचीत के लंबे खिंचने, शर्तों के कड़े होने और मनमुताबिक समर्थन मिलने में देरी की ओर इशारा करती है.

नेतन्याहू के सामने चुनौती केवल नए सहयोगियों से संपर्क साधने की नहीं, बल्कि उस बातचीत को ठोस समर्थन में तब्दील करने की है. नए साथियों को जोड़ने की होड़ में पुराने साथियों की अनदेखी सत्ता के इस खेल को और ज्यादा उलझा रही है.

इजरायल की कुंडली में भी भारी दबाव

इजरायल की कन्या लग्न की राष्ट्र कुंडली भी स्थिरता का संकेत नहीं दे रही है. इस कुंडली में गुरु का सिंह राशि में गोचर बारहवें भाव में है, जो पर्दे के पीछे की वार्ताओं, राजनीतिक रियायतों और समझौतों की मजबूरी को दिखाता है.

साथ ही सातवें भाव में बैठे शनि की दृष्टि शासन के दसवें भाव पर पड़ रही है, जिससे गठबंधन का दबाव लगातार बना हुआ है. हालांकि राष्ट्र कुंडली के लग्न का अंतिम अंशों पर होना कुछ सीमाओं में बांधता है, फिर भी यह साफ है कि सत्ता का ढांचा इस समय भारी अंतर्विरोधों से जूझ रहा है.

वापसी या सत्ता परिवर्तन: क्या कहते हैं समीकरण?

जमीनी राजनीति और दोनों कुंडलियों के गोचर को मिलाकर देखें तो नेतन्याहू के लिए दोबारा सरकार बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आता है. गुरु नए सिरे से बात करने का अवसर तो दे रहे हैं, लेकिन केतु और शनि का नकारात्मक प्रभाव उन मौकों को स्थिर समर्थन में बदलने नहीं दे रहा है.

वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए उनका दोबारा ताज पहनना मुश्किल लग रहा है और पलड़ा नेतृत्व परिवर्तन की तरफ झुकता दिखाई दे रहा है. अगर वे किसी तरह वापसी का रास्ता निकाल भी लेते हैं, तो यह सरकार बेहद कमजोर नींव और अपमानजनक समझौतों पर ही टिकी रह पाएगी.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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