नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का किया ऐलान, शांति वार्ता की कर रहे हैं मिन्नतें, जानें मोदी सरकार का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से एक दिन पहले एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत नक्सलियों ने हथियारबंद संघर्ष को अस्थाई रूप से तुरंत छोड़ने का ऐलान किया है. नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी के प्रवक्ता अभय की तरफ़ से जानकारी दी गई है कि नक्सलियों ने भारत सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए तुरंत अस्थाई रूप से हथियारबंद संघर्ष को त्यागने का फ़ैसला किया है. साथ ही अब उत्पीड़न झेल रही जनता की समस्याओं का निवारण शांति के मार्ग पर जन संघर्ष से होगा. माओवादी संगठन द्वारा जारी की गई चिट्ठी, जिस पर 15 अगस्त की तारीख लिखी हुई है उसे जारी करके कहा गया कि कई कारणों की वजह से बयान देर से जारी किया जा रहा है और माओवादियों ने मार्च 2025 के अंतिम सप्ताह से सरकार के साथ “शांति वार्ता” को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास शुरू किए थे. साथ ही 10 मई को माओवादी नक्सली संगठन के महासचिव ने प्रवक्ता कॉमरेड अभय के माध्यम से एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने सीजफायर का प्रस्ताव रखा था और एक महीने का समय मांगा ताकि केंद्रीय नेतृत्व के साथ हथियार छोड़ने के संभावित विकल्पों पर विचार-विमर्श किया जा सके. जनवरी 2024 से घेराबंदी और एनकाउंटर हुए तेजनक्सली संगठन के मुताबिक केंद्र सरकार ने उस पर प्रतिक्रिया नहीं दी थी और जनवरी 2024 से जारी घेराबंदी और एनकाउंटर अभियानों को और तेज कर दिया था. साथ ही हजारों सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए गए और 21 मई को मड्डेकोट के पास हुए CRPF के बड़े ऑपरेशन में नक्सलियों के टॉप कमांडर बसवराजू समेत 28 नक्सली मारे गए थे, जिसके बाद नक्सलियों ने शांति प्रक्रिया को अधूरा न छोड़ने का निर्णय लिया और हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकते हुए सभी राजनीतिक दलों और जनहित संगठनों के साथ समन्वय के माध्यम से जन समस्याओं को हल करने के लिए शांति वार्ता जारी रखने का निर्णय लिया है. कॉमरेड अभय ने क्या कहा नक्सल संगठन के प्रवक्ता कॉमरेड अभय के मुताबिक नक्सली नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या उनके प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और संगठन के भीतर कैडरों और नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श जारी है साथ ही पूरे देश में जितने भी नक्सली बंद है उनके साथ 1 महीने में बातचीत करने और समन्वय बनाने की मांग नक्सल नेतृत्व करता है साथ ही नक्सली प्रारंभिक वार्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने के लिए भी तैयार है. नक्सलवाद खत्म करने का टारगेट मार्च 2026 तकबयान में यह भी कहा गया कि नक्सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. बताते चलें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को देश से नक्सलवाद खत्म करने का टारगेट मार्च 2026 तक का दिया हुआ है. साथ ही साल 2014 में जो नक्सलियों का रेड कॉरिडोर 182 जिलों तक था वो आज सिर्फ 18 जिलों तक ही बचा है. ये भी पढ़ें क्या हुआ ऐसा कि प्रधानमंत्री मोदी को जनरल डिब्बे में बैठकर तय करना पड़ा 230 KM का सफर, बर्थडे पर पढ़ें पूरा किस्सा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से एक दिन पहले एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत नक्सलियों ने हथियारबंद संघर्ष को अस्थाई रूप से तुरंत छोड़ने का ऐलान किया है. नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी के प्रवक्ता अभय की तरफ़ से जानकारी दी गई है कि नक्सलियों ने भारत सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए तुरंत अस्थाई रूप से हथियारबंद संघर्ष को त्यागने का फ़ैसला किया है. साथ ही अब उत्पीड़न झेल रही जनता की समस्याओं का निवारण शांति के मार्ग पर जन संघर्ष से होगा.
माओवादी संगठन द्वारा जारी की गई चिट्ठी, जिस पर 15 अगस्त की तारीख लिखी हुई है उसे जारी करके कहा गया कि कई कारणों की वजह से बयान देर से जारी किया जा रहा है और माओवादियों ने मार्च 2025 के अंतिम सप्ताह से सरकार के साथ “शांति वार्ता” को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास शुरू किए थे. साथ ही 10 मई को माओवादी नक्सली संगठन के महासचिव ने प्रवक्ता कॉमरेड अभय के माध्यम से एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने सीजफायर का प्रस्ताव रखा था और एक महीने का समय मांगा ताकि केंद्रीय नेतृत्व के साथ हथियार छोड़ने के संभावित विकल्पों पर विचार-विमर्श किया जा सके.
जनवरी 2024 से घेराबंदी और एनकाउंटर हुए तेज
नक्सली संगठन के मुताबिक केंद्र सरकार ने उस पर प्रतिक्रिया नहीं दी थी और जनवरी 2024 से जारी घेराबंदी और एनकाउंटर अभियानों को और तेज कर दिया था. साथ ही हजारों सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए गए और 21 मई को मड्डेकोट के पास हुए CRPF के बड़े ऑपरेशन में नक्सलियों के टॉप कमांडर बसवराजू समेत 28 नक्सली मारे गए थे, जिसके बाद नक्सलियों ने शांति प्रक्रिया को अधूरा न छोड़ने का निर्णय लिया और हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकते हुए सभी राजनीतिक दलों और जनहित संगठनों के साथ समन्वय के माध्यम से जन समस्याओं को हल करने के लिए शांति वार्ता जारी रखने का निर्णय लिया है.
कॉमरेड अभय ने क्या कहा
नक्सल संगठन के प्रवक्ता कॉमरेड अभय के मुताबिक नक्सली नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या उनके प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और संगठन के भीतर कैडरों और नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श जारी है साथ ही पूरे देश में जितने भी नक्सली बंद है उनके साथ 1 महीने में बातचीत करने और समन्वय बनाने की मांग नक्सल नेतृत्व करता है साथ ही नक्सली प्रारंभिक वार्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने के लिए भी तैयार है.
नक्सलवाद खत्म करने का टारगेट मार्च 2026 तक
बयान में यह भी कहा गया कि नक्सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. बताते चलें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को देश से नक्सलवाद खत्म करने का टारगेट मार्च 2026 तक का दिया हुआ है. साथ ही साल 2014 में जो नक्सलियों का रेड कॉरिडोर 182 जिलों तक था वो आज सिर्फ 18 जिलों तक ही बचा है.
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