धनशोधन मामले में गुजरात के पत्रकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई सात अप्रैल तक स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में पत्रकार महेश लांगा की दायर याचिका पर मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को सुनवाई तीन महीने के लिए स्थगित कर दी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने मामले की सुनवाई को सात अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया, क्योंकि ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि मामला आगे बढ़ रहा है और उन्हें समय चाहिए. लांगा का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि पत्रकार द्वारा विशेष अदालत के साथ सहयोग किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर को लांगा को अंतरिम जमानत दे दी थी और मामले की सुनवाई हर रोज करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने पत्रकार पर कुछ शर्तें लगाई थीं, जिनमें उनसे किसी भी मीडिया प्रतिष्ठान में अपने विचाराधीन मामले के बारे में कोई लेख न लिखने और विशेष अदालत के समक्ष किसी भी प्रकार की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध न करने को कहा गया था. इस मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं, जिसमें ईडी ने नौ गवाहों के नाम दिए हैं. पिछले साल 31 जुलाई को गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में लांगा की जमानत याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यदि उन्हें जमानत दी जाती है, तो अभियोजन पक्ष के मामले को नुकसान पहुंचेगा. ईडी ने 25 फरवरी को कहा था कि उसने कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में लांगा को गिरफ्तार किया है. पत्रकार को पहली बार अक्टूबर 2024 में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था. लांगा के खिलाफ धनशोधन का मामला अहमदाबाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो प्राथमिकियों से जुड़ा है, जिनमें उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात, ठगी और कुछ लोगों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. यह भी पढ़ें:-गढ़चिरौली नकस्ली हमले के आरोपी को SC ने दी अंतरिम जमानत, NIA ने कहा- उसके हाथ पुलिसवालों के खून से सने
सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में पत्रकार महेश लांगा की दायर याचिका पर मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को सुनवाई तीन महीने के लिए स्थगित कर दी.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने मामले की सुनवाई को सात अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया, क्योंकि ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि मामला आगे बढ़ रहा है और उन्हें समय चाहिए.
लांगा का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि पत्रकार द्वारा विशेष अदालत के साथ सहयोग किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर को लांगा को अंतरिम जमानत दे दी थी और मामले की सुनवाई हर रोज करने का आदेश दिया था.
कोर्ट ने पत्रकार पर कुछ शर्तें लगाई थीं, जिनमें उनसे किसी भी मीडिया प्रतिष्ठान में अपने विचाराधीन मामले के बारे में कोई लेख न लिखने और विशेष अदालत के समक्ष किसी भी प्रकार की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध न करने को कहा गया था.
इस मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं, जिसमें ईडी ने नौ गवाहों के नाम दिए हैं. पिछले साल 31 जुलाई को गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में लांगा की जमानत याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि यदि उन्हें जमानत दी जाती है, तो अभियोजन पक्ष के मामले को नुकसान पहुंचेगा.
ईडी ने 25 फरवरी को कहा था कि उसने कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में लांगा को गिरफ्तार किया है. पत्रकार को पहली बार अक्टूबर 2024 में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था.
लांगा के खिलाफ धनशोधन का मामला अहमदाबाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो प्राथमिकियों से जुड़ा है, जिनमें उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात, ठगी और कुछ लोगों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है.
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