देश के इन शहरों में मिल रहे नौकरी के ज्यादा मौके, हायरिंग भी महानगरों के मुकाबले कहीं ज्यादा

देश में आमतौर पर लोग रोजगार के लिए मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रूख करते हैं, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं. उदयपुर, विशाखापत्तनम, वारंगल, लखनऊ और इंदौर जैसे छोटे शहर जॉब क्रिएशन के हब के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं. यह बदलाव बीते कुछ सालों में हुआ है. इस बात को लेकर अब लोगों की सोच बदलने लगी है कि रोजगार के अवसर सिर्फ महानगरों तक ही सीमित है.  छोटे शहरों में मिल रहे अधिक मौके देश की अर्थव्यवस्था बदल रही है. हर सेक्टर में टेक्नोलॉजी को अपनाया जाने लगा है. आलम यह है कि अब रोजगार के ज्यादा मौके छोटे शहरों और कस्बों से सामने आ रहे हैं. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की पहली छमाही में उदयपुर से विशाखापत्तनम और कोयंबटूर से नागपुर तक के छोटे शहरों ने पिछले एक साल के मुकाबले सॉफ्टवेयर और आईटी सेक्टर में रिक्रूटमेंट के मामले में बड़े शहरों से अच्छा प्रदर्शन किया. Teamlease की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के दौरान टियर-II और टियर-III शहरों में 50 परसेंट से ज्यादा नियुक्तियां हुईं. जबकि बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहरों में केवल 12-15 परसेंट तक का ही इजाफा हुआ.  आईटी सेक्टर में भी छोटे शहर निकले आगे टीमलीज डिजिटल की चीफ एक्जीक्यूटिव नीति शर्मा ने ET से बात करते हुए कहा, ''साल 2025 में देश के आईटी सेक्टर में बड़ा बदलाव आया. टियर-2 और टियर-3 शहरों में इस सेक्टर में लोगों को ज्यादा नौकरियां मिलीं.'' यह बदलाव कुछ सालों में, खासकर कोरोना महामारी के बाद से हुआ है. कोयंबटूर, नागपुर और नासिक जैसे शहरों में पिछले साल के मुकाबले इस साल में अब तक 20-25 परसेंट तक लोगों को नौकरियां मिलीं. इंदौर और जयपुर में आईटी फील्ड में 30-40 परसेंट लोग काम पर लिए गए. टीमलीज की डेटा के मुताबिक, सहायक कार्यों में नियुक्ति टियर-II और टियर-III शहरों में 24-31 परसेंट रही, जबकि टियर-I शहरों में 8-15 परसेंट दर्ज की गई.  छोटे शहरों का रूख कर रही कंपनियां इससे एक बात तो साफ है कि छोटे शहरों में पिछले कुछ सालों में BFSI, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और आईटी सेक्टर में जबरदस्त उछाल आया. रैंडस्टैड टैलेंट इनसाइट्स रिपोर्ट 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-II शहरों में नौकरियों के अवसर लगभग 42 परसेंट तक बढ़े हैं, जबकि टियर-1 शहरों में सिर्फ 19 परसेंट तक की ही बढ़ोतरी हुई है.  छोटे-छोटे शहरों में भी तेजी से खपत बढ़ रही है, बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है, शिक्षा में सुधार हो रहा है. ऐसे में कई कंपनियां कम लागत का ध्यान रखते हुए इन शहरों का रूख कर रही हैं. नतीजतन, काम करने के मौके यहां भी ज्यादा से ज्यादा मिल रहे हैं.    ये भी पढ़ें: जून में चीन ने दूसरे देशों को भर-भरकर भेजा सामान, रेयर अर्थ की शिपमेंट ने भी पकड़ी रफ्तार

Jul 15, 2025 - 10:30
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देश के इन शहरों में मिल रहे नौकरी के ज्यादा मौके, हायरिंग भी महानगरों के मुकाबले कहीं ज्यादा

देश में आमतौर पर लोग रोजगार के लिए मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रूख करते हैं, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं. उदयपुर, विशाखापत्तनम, वारंगल, लखनऊ और इंदौर जैसे छोटे शहर जॉब क्रिएशन के हब के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं. यह बदलाव बीते कुछ सालों में हुआ है. इस बात को लेकर अब लोगों की सोच बदलने लगी है कि रोजगार के अवसर सिर्फ महानगरों तक ही सीमित है. 

छोटे शहरों में मिल रहे अधिक मौके

देश की अर्थव्यवस्था बदल रही है. हर सेक्टर में टेक्नोलॉजी को अपनाया जाने लगा है. आलम यह है कि अब रोजगार के ज्यादा मौके छोटे शहरों और कस्बों से सामने आ रहे हैं. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की पहली छमाही में उदयपुर से विशाखापत्तनम और कोयंबटूर से नागपुर तक के छोटे शहरों ने पिछले एक साल के मुकाबले सॉफ्टवेयर और आईटी सेक्टर में रिक्रूटमेंट के मामले में बड़े शहरों से अच्छा प्रदर्शन किया. Teamlease की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के दौरान टियर-II और टियर-III शहरों में 50 परसेंट से ज्यादा नियुक्तियां हुईं. जबकि बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहरों में केवल 12-15 परसेंट तक का ही इजाफा हुआ. 

आईटी सेक्टर में भी छोटे शहर निकले आगे

टीमलीज डिजिटल की चीफ एक्जीक्यूटिव नीति शर्मा ने ET से बात करते हुए कहा, ''साल 2025 में देश के आईटी सेक्टर में बड़ा बदलाव आया. टियर-2 और टियर-3 शहरों में इस सेक्टर में लोगों को ज्यादा नौकरियां मिलीं.'' यह बदलाव कुछ सालों में, खासकर कोरोना महामारी के बाद से हुआ है. कोयंबटूर, नागपुर और नासिक जैसे शहरों में पिछले साल के मुकाबले इस साल में अब तक 20-25 परसेंट तक लोगों को नौकरियां मिलीं. इंदौर और जयपुर में आईटी फील्ड में 30-40 परसेंट लोग काम पर लिए गए. टीमलीज की डेटा के मुताबिक, सहायक कार्यों में नियुक्ति टियर-II और टियर-III शहरों में 24-31 परसेंट रही, जबकि टियर-I शहरों में 8-15 परसेंट दर्ज की गई. 

छोटे शहरों का रूख कर रही कंपनियां

इससे एक बात तो साफ है कि छोटे शहरों में पिछले कुछ सालों में BFSI, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और आईटी सेक्टर में जबरदस्त उछाल आया. रैंडस्टैड टैलेंट इनसाइट्स रिपोर्ट 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-II शहरों में नौकरियों के अवसर लगभग 42 परसेंट तक बढ़े हैं, जबकि टियर-1 शहरों में सिर्फ 19 परसेंट तक की ही बढ़ोतरी हुई है.  छोटे-छोटे शहरों में भी तेजी से खपत बढ़ रही है, बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है, शिक्षा में सुधार हो रहा है. ऐसे में कई कंपनियां कम लागत का ध्यान रखते हुए इन शहरों का रूख कर रही हैं. नतीजतन, काम करने के मौके यहां भी ज्यादा से ज्यादा मिल रहे हैं. 

 

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जून में चीन ने दूसरे देशों को भर-भरकर भेजा सामान, रेयर अर्थ की शिपमेंट ने भी पकड़ी रफ्तार

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