घर में नहीं है किचन गार्डन की जगह, जानें कैसे किराए पर उगाएं ताजी सब्जियां?
महानगरों और बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के बीच अब अपनी सेहत को लेकर जारूकता तेजी से बढ़ रही है. लोग इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि उनकी थाली में परोसी जाने वाली सब्जियां कहां उगाई जा रही हैं और उनमें किस तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है. शुद्ध और जैविक सब्जियां खाने के लिए बहुत से लोग अपने घरों में किचन गार्डन बनाना चाहते हैं, लेकिन शहरों के छोटे फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में जगह की भारी कमी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है. ऐसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए देश के स्टार्टअप्स और कृषि फार्मों ने एक बेहद अनोखा बिजनेस मॉडल पेश किया है, जिसे रेंट-ए-फार्म कहा जा रहा है. इस मॉडल के तहत अब शहरी उपभोक्ता बिना खेती की जमीन खरीदें, अपनी पसंद की ताजी और बिना केमिकल वाली सब्जियां उगाने के लिए जमीन किराए पर ले सकते हैं. क्या है रेंट ए फार्म मॉडल और यह कैसे काम करता है? यह एक तरह का सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल है, जिसमें आपको खेती सीखने, महंगे उपकरण खरीदने या अपना वीकेंड खेतों में पसीना बहाकर बिताने की कोई जरूरत नहीं होती. इसके तहत आप एक निश्चित अवधि के लिए किसी बड़े कृषि फार्म में एक छोटा सा हिस्सा या प्लॉट किराए पर लेते हैं. भारत में इस समय हो अलग-अलग तरीकों से इस मॉडल पर काम हो रहा है. पहले तरीके में पूरी जिम्मेदारी फार्म चलाने वाली कंपनी की होती है, जहां वे आपकी चुनी हुई मौसमी सब्जियां उगाते हैं और हर हफ्ते उसकी पैदावार सीधे आपके घर पहुंचाते हैं. वहीं दूसरा तरीका उन लोगों के लिए है जो खुद खेती है अनुभव लेना चाहते हैं. इसमें उन्हें जमीन का एक टुकड़ा दे दिया जाता है, जहां वे खुद जाकर बुवाई का आनंद ले सकते हैं और फार्म की टीम उन्हें पानी, बिजली और मजदूर जैसी सुविधाएं प्रदान करती है. View this post on Instagram A post shared by Mantaj Sidhu (@mantajsidhu_) पंजाब का गिल ऑर्गेनिक मॉडल पंजाब में चल रहे गिल ऑर्गेनिक्स के जरिए इस मॉडल की भारी लोकप्रियता को समझा जा सकता है. इसके संस्थापक मंतज सिद्धू ने यूरोप के एक कॉन्सेप्ट से प्रेरित होकर भारत में इसकी शुरुआत की. गिल ऑर्गेनिक्स शहरी परिवारों को छह महीने के सीजन के लिए लगभग 150 वर्ग गज का एक समर्पित प्लॉट किराए पर देता है. ग्राहक अपनी पसंद की मौसमी सब्जियां और सलाद चुनते हैं, जिनकी देखभाल और खेती फार्म की एक्सपर्ट टीम करती है. इसके बाद हर हफ्ते ताजी कटी हुई सब्जियां सीधे उनके घर डिलीवर की जाती हैं. यह एक छोटे परिवार की 60 से 70 फीसदी साप्ताहिक जरूरत को पूरा कर देता है. वर्तमान में यह सर्विस पटियाला, लुधियाना और चंडीगढ़ ट्रिसिटी में उपलब्ध है, जिसकी छह महीने की फीस 35,000 से 40,000 रुपये के बीच है. खास बात यह है कि यहां मांग इतनी ज्यादा है कि 200 परिवारों की क्षमता के मुकाबले करीब 3,000 लोग वेटिंग लिस्ट में हैं. यह भी पढ़ें: वर्क लाइफ बैलेंस के लिए क्या है 52/17 रूल, इससे कैसे बढ़ती है प्रोडक्टिविटी? View this post on Instagram A post shared by Vaksana Farms (Farm Stay, Corporate Retreats & School Programs) (@vaksanafarms) तमिलनाडु का वकसाना फार्म्स यदि आप केवल घर पर सब्जियां मंगाने के बजाय खुद मिट्टी से जुड़ना चाहते हैं और खेती की बारीकियों को सीखना चाहते हैं, तो तमिलनाडु का वकसाना फार्म्स इसका बेहतरीन उदाहरण है. रेट्टनई गांव के पास स्थित इस 14 एकड़ के फार्म के सह-संस्थापक किरुबा शंकर ग्राहकों को लगभग 3,000 वर्ग फुट का प्लॉट किराए पर देते हैं, जिसका मासिक किराया 15,000 रुपये है. यहां का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह अहसास कराना है कि भोजन उगाने में कितनी मेहनत और अनिश्चितता जुड़ी होती है. अक्सर लोग फार्म स्टे का आनंद लेने के बाद जोश में आकर सीधे जमीन खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में वे खेती के काम को संभाल नहीं पाते. किरुबा शंकर इसके लिए बिल्ड योर प्रॉफिटेबल ड्रीम फार्म नाम से वर्कशॉप भी चलाते हैं, ताकि लोग अपनी गाढ़ी कमाई जमीन खरीदने में लगाने से पहले रेंट-ए-फार्म के जरिए एक ट्रायल रन ले सकें और खेती की जमीनी हकीकत को समझ सकें. यह भी पढ़ें: रह-रहकर आ रही खांसी, कहीं पॉल्यूशन का शिकार तो नहीं हो गए आप?
महानगरों और बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के बीच अब अपनी सेहत को लेकर जारूकता तेजी से बढ़ रही है. लोग इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि उनकी थाली में परोसी जाने वाली सब्जियां कहां उगाई जा रही हैं और उनमें किस तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है. शुद्ध और जैविक सब्जियां खाने के लिए बहुत से लोग अपने घरों में किचन गार्डन बनाना चाहते हैं, लेकिन शहरों के छोटे फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में जगह की भारी कमी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है.
ऐसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए देश के स्टार्टअप्स और कृषि फार्मों ने एक बेहद अनोखा बिजनेस मॉडल पेश किया है, जिसे रेंट-ए-फार्म कहा जा रहा है. इस मॉडल के तहत अब शहरी उपभोक्ता बिना खेती की जमीन खरीदें, अपनी पसंद की ताजी और बिना केमिकल वाली सब्जियां उगाने के लिए जमीन किराए पर ले सकते हैं.
क्या है रेंट ए फार्म मॉडल और यह कैसे काम करता है?
यह एक तरह का सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल है, जिसमें आपको खेती सीखने, महंगे उपकरण खरीदने या अपना वीकेंड खेतों में पसीना बहाकर बिताने की कोई जरूरत नहीं होती. इसके तहत आप एक निश्चित अवधि के लिए किसी बड़े कृषि फार्म में एक छोटा सा हिस्सा या प्लॉट किराए पर लेते हैं.
भारत में इस समय हो अलग-अलग तरीकों से इस मॉडल पर काम हो रहा है. पहले तरीके में पूरी जिम्मेदारी फार्म चलाने वाली कंपनी की होती है, जहां वे आपकी चुनी हुई मौसमी सब्जियां उगाते हैं और हर हफ्ते उसकी पैदावार सीधे आपके घर पहुंचाते हैं. वहीं दूसरा तरीका उन लोगों के लिए है जो खुद खेती है अनुभव लेना चाहते हैं. इसमें उन्हें जमीन का एक टुकड़ा दे दिया जाता है, जहां वे खुद जाकर बुवाई का आनंद ले सकते हैं और फार्म की टीम उन्हें पानी, बिजली और मजदूर जैसी सुविधाएं प्रदान करती है.
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पंजाब का गिल ऑर्गेनिक मॉडल
पंजाब में चल रहे गिल ऑर्गेनिक्स के जरिए इस मॉडल की भारी लोकप्रियता को समझा जा सकता है. इसके संस्थापक मंतज सिद्धू ने यूरोप के एक कॉन्सेप्ट से प्रेरित होकर भारत में इसकी शुरुआत की. गिल ऑर्गेनिक्स शहरी परिवारों को छह महीने के सीजन के लिए लगभग 150 वर्ग गज का एक समर्पित प्लॉट किराए पर देता है. ग्राहक अपनी पसंद की मौसमी सब्जियां और सलाद चुनते हैं, जिनकी देखभाल और खेती फार्म की एक्सपर्ट टीम करती है.
इसके बाद हर हफ्ते ताजी कटी हुई सब्जियां सीधे उनके घर डिलीवर की जाती हैं. यह एक छोटे परिवार की 60 से 70 फीसदी साप्ताहिक जरूरत को पूरा कर देता है. वर्तमान में यह सर्विस पटियाला, लुधियाना और चंडीगढ़ ट्रिसिटी में उपलब्ध है, जिसकी छह महीने की फीस 35,000 से 40,000 रुपये के बीच है. खास बात यह है कि यहां मांग इतनी ज्यादा है कि 200 परिवारों की क्षमता के मुकाबले करीब 3,000 लोग वेटिंग लिस्ट में हैं.
यह भी पढ़ें: वर्क लाइफ बैलेंस के लिए क्या है 52/17 रूल, इससे कैसे बढ़ती है प्रोडक्टिविटी?
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तमिलनाडु का वकसाना फार्म्स
यदि आप केवल घर पर सब्जियां मंगाने के बजाय खुद मिट्टी से जुड़ना चाहते हैं और खेती की बारीकियों को सीखना चाहते हैं, तो तमिलनाडु का वकसाना फार्म्स इसका बेहतरीन उदाहरण है. रेट्टनई गांव के पास स्थित इस 14 एकड़ के फार्म के सह-संस्थापक किरुबा शंकर ग्राहकों को लगभग 3,000 वर्ग फुट का प्लॉट किराए पर देते हैं, जिसका मासिक किराया 15,000 रुपये है.
यहां का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह अहसास कराना है कि भोजन उगाने में कितनी मेहनत और अनिश्चितता जुड़ी होती है. अक्सर लोग फार्म स्टे का आनंद लेने के बाद जोश में आकर सीधे जमीन खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में वे खेती के काम को संभाल नहीं पाते. किरुबा शंकर इसके लिए बिल्ड योर प्रॉफिटेबल ड्रीम फार्म नाम से वर्कशॉप भी चलाते हैं, ताकि लोग अपनी गाढ़ी कमाई जमीन खरीदने में लगाने से पहले रेंट-ए-फार्म के जरिए एक ट्रायल रन ले सकें और खेती की जमीनी हकीकत को समझ सकें.
यह भी पढ़ें: रह-रहकर आ रही खांसी, कहीं पॉल्यूशन का शिकार तो नहीं हो गए आप?
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