गढ़चिरौली नकस्ली हमले के आरोपी को SC ने दी अंतरिम जमानत, NIA ने कहा- उसके हाथ पुलिसवालों के खून से सने

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में वर्ष 2019 में ‘परिष्कृत विस्फोटक उपकरण’ (IED) से किए गए विस्फोट में 15 पुलिसकर्मियों की मौत से जुड़े सनसनीखेज मामले में कथित नक्सल समर्थक कैलाश रामचंदानी को अंतरिम जमानत दे दी. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने उसका हाथ पुलिसकर्मियों के खून से सने होने का आरोप लगाया, लेकिन इसके बावजूद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने विभिन्न शर्तों के साथ उसे अंतरिम जमानत दी. इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि रामचंदानी 29 जून, 2019 को गिरफ्तारी के बाद से जेल में थे, पीठ ने कई शर्तों के साथ जमानत दी. इनमें यह शर्त भी शामिल है कि वह अपने पैतृक स्थान गढ़चिरौली में ही रहेंगे और विशेष एनआईए अदालत की पूर्व अनुमति के बिना बाहर नहीं जा सकेंगे. पीठ ने कहा कि वह केवल मुंबई स्थित विशेष एनआईए अदालत में सुनवाई के लिए गढ़चिरौली से बाहर जा सकते हैं और उन्हें हर हफ्ते एक बार स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट करना होगा. इसके अलावा आरोपी को पुलिस को अपना मोबाइल नंबर देना होगा और वह मामले की चल रही सुनवाई में किसी भी प्रकार के स्थगन का अनुरोध नहीं करेगा. पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि यह पाया जाता है कि आरोपी ने क्षेत्र में नक्सलियों से संपर्क साधने का प्रयास किया था और जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है, तो एनआईए अंतरिम राहत रद्द करने का अनुरोध कर सकती है. रामचंदानी ने पांच मार्च, 2024 को बंबई उच्च न्यायालय द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी. उन्होंने तर्क दिया था कि वह 2019 से जेल में हैं और इस मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं और सह-आरोपियों को जमानत दे दी गई है. शुरुआत में एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि 15 पुलिसकर्मियों की हत्या से संबंधित मामले में आरोपी की अहम भूमिका थी. विधि अधिकारी ने बताया कि पुलिसकर्मियों के एक विशिष्ट स्थान पर जाने की सूचना मिलने के बाद ही आईईडी के जरिये विस्फोट किया गया. याचिका का विरोध करते हुए भाटी ने कहा कि विशेष अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है और कई महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ किया जाना अभी बाकी है. लेकिन पीठ ने कहा कि आरोपी एक व्यवसायी है और 2019 से जेल में है.   यह भी पढ़ें:-ऑपरेशन सिंदूर पर पोस्ट करने वाले प्रोफेसर महमूदाबाद पर नहीं चलेगा केस? SC ने हरियाणा सरकार से कहा- नरम रुख दिखाओ

Jan 6, 2026 - 19:30
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गढ़चिरौली नकस्ली हमले के आरोपी को SC ने दी अंतरिम जमानत, NIA ने कहा- उसके हाथ पुलिसवालों के खून से सने

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में वर्ष 2019 में ‘परिष्कृत विस्फोटक उपकरण’ (IED) से किए गए विस्फोट में 15 पुलिसकर्मियों की मौत से जुड़े सनसनीखेज मामले में कथित नक्सल समर्थक कैलाश रामचंदानी को अंतरिम जमानत दे दी.

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने उसका हाथ पुलिसकर्मियों के खून से सने होने का आरोप लगाया, लेकिन इसके बावजूद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने विभिन्न शर्तों के साथ उसे अंतरिम जमानत दी.

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि रामचंदानी 29 जून, 2019 को गिरफ्तारी के बाद से जेल में थे, पीठ ने कई शर्तों के साथ जमानत दी. इनमें यह शर्त भी शामिल है कि वह अपने पैतृक स्थान गढ़चिरौली में ही रहेंगे और विशेष एनआईए अदालत की पूर्व अनुमति के बिना बाहर नहीं जा सकेंगे.

पीठ ने कहा कि वह केवल मुंबई स्थित विशेष एनआईए अदालत में सुनवाई के लिए गढ़चिरौली से बाहर जा सकते हैं और उन्हें हर हफ्ते एक बार स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट करना होगा. इसके अलावा आरोपी को पुलिस को अपना मोबाइल नंबर देना होगा और वह मामले की चल रही सुनवाई में किसी भी प्रकार के स्थगन का अनुरोध नहीं करेगा.

पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि यह पाया जाता है कि आरोपी ने क्षेत्र में नक्सलियों से संपर्क साधने का प्रयास किया था और जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है, तो एनआईए अंतरिम राहत रद्द करने का अनुरोध कर सकती है.

रामचंदानी ने पांच मार्च, 2024 को बंबई उच्च न्यायालय द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी. उन्होंने तर्क दिया था कि वह 2019 से जेल में हैं और इस मामले में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं और सह-आरोपियों को जमानत दे दी गई है.

शुरुआत में एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि 15 पुलिसकर्मियों की हत्या से संबंधित मामले में आरोपी की अहम भूमिका थी. विधि अधिकारी ने बताया कि पुलिसकर्मियों के एक विशिष्ट स्थान पर जाने की सूचना मिलने के बाद ही आईईडी के जरिये विस्फोट किया गया.

याचिका का विरोध करते हुए भाटी ने कहा कि विशेष अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है और कई महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ किया जाना अभी बाकी है. लेकिन पीठ ने कहा कि आरोपी एक व्यवसायी है और 2019 से जेल में है.

 

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