कंगाली से गुजर रहे पाकिस्तान ने IMF के सामने फिर फैलाई झोली, मांगी 1.3 अरब डॉलर की मदद

International Monetary Fund: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी बोर्ड की बैठक 9 मई को होने वाली है. इसमें पाकिस्तान के साथ हुए 1.3 अरब डॉलर के स्टाफ लेवल समझौते पर विचार किया जाएगा, जो पाकिस्तान के साथ चल रहे 37 महीने के बेलआउट कार्यक्रम का हिस्सा है.  37 महीने की इस डील के 9 मई को पहला रिव्यू बता दें कि जुलाई 2024 में पाकिस्तान ने IMF से 7 अरब डॉलर की डील की थी. 37 महीने की इस डील के छह रिव्यू होने हैं. 9 मई को इसका दूसरा रिव्यू होना है. अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की किश्त दी जाएगी. (पाकिस्तान के लिए यह डील काफी मायने रखती है क्योंकि देश में महंगाई चरम पर है, विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया है, शेयर बाजार में भी लगातार गिरावट जारी है. इससे पहले मार्च में IMF और पाकिस्तान के बीच मार्च में 28 महीने की स्टाफ-लेवल डील पर सहमति बनी थी, जिसका मकसद जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और उससे निपटने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का समर्थन करना था.  आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए मदद 37 महीने के बेलआउट कार्यक्रम के तहत मार्च में जब आईएमएफ की टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था, तब पाया था कि पाकिस्तान ने आर्थिक सुधार के लिए कई उपाय किए हैं जैसे कि महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को ऊंची रखना, उर्जा क्षेत्र में सुधार होते पाया गया. बेलआउट दरअसल, आर्थिक रूप से खतरे का सामना कर रही किसी देश को वित्तीय मदद देने का एक तरीका है ताकि वहां की आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सके. अगर इस बार कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी मिल जाती है, तो पाकिस्तान को विस्तारित निधि सुविधा (EFF) के तहत 1 अरब डॉलर की राशि मिलेगी. इसी के साथ इस कार्यक्रम के तहत कुल बंटवारा 2 अरब डॉलर हो जाएगा. इससे पहले सितंबर 2024 में 1.03 बिलियन डॉलर की पहली किश्त दी गई थी. पाकिस्तान 1950 से आईएमएफ का सदस्य है, जो आयात पर निर्भरता कम करने और देश में आर्थिक अस्थिरता के कारण IMF के सामने 24 बार हाथ फैला चुका है.  ये भी पढ़ें:  पहलगाम हमले का असर- इस्लामाबाद से कराची तक सब परेशान, पाकिस्तान ने चंद दिनों में गंवाएं 70000 करोड़ रुपये

Apr 29, 2025 - 19:30
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कंगाली से गुजर रहे पाकिस्तान ने IMF के सामने फिर फैलाई झोली, मांगी 1.3 अरब डॉलर की मदद

International Monetary Fund: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी बोर्ड की बैठक 9 मई को होने वाली है. इसमें पाकिस्तान के साथ हुए 1.3 अरब डॉलर के स्टाफ लेवल समझौते पर विचार किया जाएगा, जो पाकिस्तान के साथ चल रहे 37 महीने के बेलआउट कार्यक्रम का हिस्सा है. 

37 महीने की इस डील के 9 मई को पहला रिव्यू

बता दें कि जुलाई 2024 में पाकिस्तान ने IMF से 7 अरब डॉलर की डील की थी. 37 महीने की इस डील के छह रिव्यू होने हैं. 9 मई को इसका दूसरा रिव्यू होना है. अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की किश्त दी जाएगी.

(पाकिस्तान के लिए यह डील काफी मायने रखती है क्योंकि देश में महंगाई चरम पर है, विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया है, शेयर बाजार में भी लगातार गिरावट जारी है. इससे पहले मार्च में IMF और पाकिस्तान के बीच मार्च में 28 महीने की स्टाफ-लेवल डील पर सहमति बनी थी, जिसका मकसद जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और उससे निपटने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का समर्थन करना था. 

आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए मदद

37 महीने के बेलआउट कार्यक्रम के तहत मार्च में जब आईएमएफ की टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था, तब पाया था कि पाकिस्तान ने आर्थिक सुधार के लिए कई उपाय किए हैं जैसे कि महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को ऊंची रखना, उर्जा क्षेत्र में सुधार होते पाया गया. बेलआउट दरअसल, आर्थिक रूप से खतरे का सामना कर रही किसी देश को वित्तीय मदद देने का एक तरीका है ताकि वहां की आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सके.

अगर इस बार कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी मिल जाती है, तो पाकिस्तान को विस्तारित निधि सुविधा (EFF) के तहत 1 अरब डॉलर की राशि मिलेगी. इसी के साथ इस कार्यक्रम के तहत कुल बंटवारा 2 अरब डॉलर हो जाएगा. इससे पहले सितंबर 2024 में 1.03 बिलियन डॉलर की पहली किश्त दी गई थी. पाकिस्तान 1950 से आईएमएफ का सदस्य है, जो आयात पर निर्भरता कम करने और देश में आर्थिक अस्थिरता के कारण IMF के सामने 24 बार हाथ फैला चुका है. 

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पहलगाम हमले का असर- इस्लामाबाद से कराची तक सब परेशान, पाकिस्तान ने चंद दिनों में गंवाएं 70000 करोड़ रुपये

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