एक ही फोन में दो सिम कैसे काम करती हैं? यहां जानें डुअल सिम फोन के फायदे-नुकसान समेत सारी बातें

एक टाइम था, जब फोन में सिर्फ एक ही सिम चल सकती थी. दूसरी सिम चलाने के लिए कई जुगाड़ करने पड़ते थे. अब टेक्नोलॉजी के एडवांस होने के साथ ही एक फोन में दो सिम आसानी से चल जाती हैं. आजकल अधिकतर फोन डुअल सिम सपोर्ट के साथ आते हैं. इससे लोगों को पर्सनल और प्रोफेशनल कामों के लिए दो अलग-अलग फोन नहीं रखने पड़ते. लेकिन क्या आपने सोचा है कि डुअल सिम वाले फोन कैसे काम करते हैं और इनके फायदे-नुकसान क्या हैं? आज हम इन सवालों के जवाब लेकर आए हैं. कैसे काम करते हैं डुअल सिम फोन? डुअल सिम डुअल स्टैंडबाय (DSDS)- यह डुअल सिम फोन का सबसे कॉमन सेटअप है, जिसमें दोनों सिम कार्ड स्टैंडबाय पर होते हैं. यानी दोनों ही फोन कॉल्स और टेक्स्ट रिसीव करने के लिए तैयार होते हैं. हालांकि, जब एक सिम एक्टिव यूज जैसे कॉलिंग आदि में होती हैं तो दूसरी ऑफलाइन हो जाती है. यह सेटअप आपको दो अलग-अलग फोन रखने के झंझट से छुटकारा दिला देता है, लेकिन इसमें आप दोनों सिम को एक ही समय पर एक्टिवली यूज नहीं कर सकते. डुअल सिम डुअल एक्टिव (DSDA)- यह सेटअप DSDS से एक स्टेप आगे हैं. जैसा नाम से ही जाहिर है, इसमें दोनों ही सिम पूरे टाइम एक्टिव रहती है. इसमें पहली सिम बिजी होने पर भी दूसरी सिम पर कॉल रिसीव हो सकती है. यह सेटअप उन लोगों के लिए काम का होता है, जो लगातार अलग-अलग कॉल्स पर बिजी होते हैं. यह सेटअप DSDS के मुकाबले थोड़ा महंगा होता है और यह बैटरी की भी खपत ज्यादा करता है. डुअल सिम फोन के फायदे-नुकसान फायदे- दो फोन रखने का झंझट नहीं रहता और यह ट्रैवल फ्रैंडली भी है. एक ही फोन पर दो प्रोवाइडर की सर्विस यूज की जा सकती है. एक सिम में नेटवर्क न रहने पर दूसरी यूज की जा सकती है. नुकसान- डुअल सिम फोन को सेटअप और मैनेज करना थोड़ा मुश्किल होता है. इसकी लागत ज्यादा आती है और यह बैटरी भी ज्यादा कंज्यूम करता है. सेकेंडरी सिम पर डेटा स्पीड का इश्यू रहता है.  कई फोन में सेकेंडरी सिम मेमोरी कार्ड वाले स्लॉट में लगती है. इसलिए मेमोरी कार्ड इन्सर्ट करने का ऑप्शन नहीं रहता. ये भी पढ़ें- Apple की iOS 26.4 अपडेट में मिल सकते हैं AI सिरी समेत कई फीचर्स, जानिए और क्या-क्या मिलेगा

Feb 8, 2026 - 10:30
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एक ही फोन में दो सिम कैसे काम करती हैं? यहां जानें डुअल सिम फोन के फायदे-नुकसान समेत सारी बातें

एक टाइम था, जब फोन में सिर्फ एक ही सिम चल सकती थी. दूसरी सिम चलाने के लिए कई जुगाड़ करने पड़ते थे. अब टेक्नोलॉजी के एडवांस होने के साथ ही एक फोन में दो सिम आसानी से चल जाती हैं. आजकल अधिकतर फोन डुअल सिम सपोर्ट के साथ आते हैं. इससे लोगों को पर्सनल और प्रोफेशनल कामों के लिए दो अलग-अलग फोन नहीं रखने पड़ते. लेकिन क्या आपने सोचा है कि डुअल सिम वाले फोन कैसे काम करते हैं और इनके फायदे-नुकसान क्या हैं? आज हम इन सवालों के जवाब लेकर आए हैं.

कैसे काम करते हैं डुअल सिम फोन?

डुअल सिम डुअल स्टैंडबाय (DSDS)- यह डुअल सिम फोन का सबसे कॉमन सेटअप है, जिसमें दोनों सिम कार्ड स्टैंडबाय पर होते हैं. यानी दोनों ही फोन कॉल्स और टेक्स्ट रिसीव करने के लिए तैयार होते हैं. हालांकि, जब एक सिम एक्टिव यूज जैसे कॉलिंग आदि में होती हैं तो दूसरी ऑफलाइन हो जाती है. यह सेटअप आपको दो अलग-अलग फोन रखने के झंझट से छुटकारा दिला देता है, लेकिन इसमें आप दोनों सिम को एक ही समय पर एक्टिवली यूज नहीं कर सकते.

डुअल सिम डुअल एक्टिव (DSDA)- यह सेटअप DSDS से एक स्टेप आगे हैं. जैसा नाम से ही जाहिर है, इसमें दोनों ही सिम पूरे टाइम एक्टिव रहती है. इसमें पहली सिम बिजी होने पर भी दूसरी सिम पर कॉल रिसीव हो सकती है. यह सेटअप उन लोगों के लिए काम का होता है, जो लगातार अलग-अलग कॉल्स पर बिजी होते हैं. यह सेटअप DSDS के मुकाबले थोड़ा महंगा होता है और यह बैटरी की भी खपत ज्यादा करता है.

डुअल सिम फोन के फायदे-नुकसान

फायदे-

  • दो फोन रखने का झंझट नहीं रहता और यह ट्रैवल फ्रैंडली भी है.
  • एक ही फोन पर दो प्रोवाइडर की सर्विस यूज की जा सकती है.
  • एक सिम में नेटवर्क न रहने पर दूसरी यूज की जा सकती है.

नुकसान-

  • डुअल सिम फोन को सेटअप और मैनेज करना थोड़ा मुश्किल होता है.
  • इसकी लागत ज्यादा आती है और यह बैटरी भी ज्यादा कंज्यूम करता है.
  • सेकेंडरी सिम पर डेटा स्पीड का इश्यू रहता है. 
  • कई फोन में सेकेंडरी सिम मेमोरी कार्ड वाले स्लॉट में लगती है. इसलिए मेमोरी कार्ड इन्सर्ट करने का ऑप्शन नहीं रहता.

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