इन फूड प्रिजर्वेटिव्स से बढ़ सकता है कैंसर और डायबिटीज का खतरा, नई स्टडी में हुआ खुलासा
आजकल हम में से बहुत लोग पैकेटबंद और तैयार खाने वाले उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. ये खाने में सुविधाजनक होते हैं और आसानी से उपलब्ध भी होते हैं, लेकिन हाल ही में हुए बड़े शोध से पता चला है कि कुछ फूड आइटम्स में यूज होने वाले कुछ सामान्य प्रिजर्वेटिव्स यानी रासायनिक संरक्षक हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. फ्रांस में किए गए और ब्रिटिश मेडिकल जर्नल और नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित दो बड़े अध्ययनों में 2009 से 2023 के बीच 1 लाख से ज्यादा वयस्कों के डाइट और स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया. यह अध्ययन न्यूट्रीनेट-सैंट समूह के तहत किया गया था और इसका मकसद यह समझना था कि लंबे समय तक इन प्रिजर्वेटिव्स का सेवन करने से कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है या नहीं. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स क्या हैं? अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स वे होते हैं जो फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं. इनमें आमतौर पर बहुत ज्यादा चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट्स होती है, जबकि जरूरी पोषक तत्व जैसे विटामिन और मिनरल्स बहुत कम होते हैं. इन प्रोडक्ट में अक्सर प्रिजर्वेटिव्स, इमल्सीफायर और स्टेबिलाइजर जैसे एडिटिव्स भी शामिल होते हैं. ये ऐसे रसायन हैं जो सामान्य घर के खाने में शायद ही यूज होते हैं. शोध से क्या मिला? शोध में 17 आम प्रिजर्वेटिव्स की जांच की गई, जिनमें पोटेशियम सॉर्बेट, सोडियम नाइट्राइट और एसीटिक एसिड जैसे पदार्थ शामिल हैं. ये सभी भारत में बिकने वाले पैकेटबंद फूड में आमतौर पर पाए जाते हैं. पोटेशियम सॉर्बेट का ज्यादा सेवन करने पर समग्र कैंसर का खतरा 14 प्रतिशत और स्तन कैंसर का खतरा 26 प्रतिशत बढ़ सकता है. सल्फाइट्स समग्र कैंसर का खतरा 12 प्रतिशत बढ़ा. सोडियम नाइट्राइट से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 32 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. पोटैशियम नाइट्रेट और एसीटिक एसिड का सेवन समग्र कैंसर और स्तन कैंसर से जुड़ा. हालांकि शोधकर्ताओं ने साफ किया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन प्रिजर्वेटिव्स का सेवन सीधे तौर पर कैंसर का कारण है. इसके लिए और गहन अध्ययन की जरूरत है.लेकिन यह जरूर माना गया कि ये रसायन शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ा सकते हैं और आंत के माइक्रोबायोटा को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे कैंसर और अन्य रोगों का खतरा बढ़ सकता है. भारतीय प्रिजर्वेटिव्स भारत में पैकेटबंद फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये निष्कर्ष इस बात को और पुष्ट करते हैं कि आधुनिक डाइट पैटर्न, जो ज्यादातर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने पर आधारित है, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. विशेषज्ञ का कहना है कि इन परिणामों के आधार पर तुरंत नियामक समीक्षा और जनता में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. उनका कहना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पहले ही मेटाबॉलिज्म और मानसिक विकारों, असमय मृत्यु समेत लगभग 32 स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े पाए जा चुके हैं. कैसे नुकसान पहुंचाते हैं प्रिजर्वेटिव्स? फूड आइटम्स में प्रिजर्वेटिव्स मुख्य रूप से उन्हें खराब होने से रोकने और उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए मिलाए जाते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये खाने की प्राकृतिक संरचना को भी प्रभावित कर सकते हैं.जब यह संरचना खराब हो जाती है, तो स्वस्थ पोषक तत्व भी हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं. कई प्रिजर्वेटिव्स लंबे समय तक शरीर में कई स्तर की सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और आंत के माइक्रोबायोटा में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं. क्या किया जा सकता है? शोधकर्ताओं का सुझाव है कि नियामकों को प्रिजर्वेटिव्स के यूज पर कड़ी निगरानी और नियम बनाने चाहिए. तब तक, उपभोक्ताओं को जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड फूड लेने की सलाह दी जाती है. दुनिया के कई देशों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर नीतिगत कार्रवाई शुरू हो चुकी है. ब्रिटेन में बच्चों की सुरक्षा के लिए टीवी और ऑनलाइन विज्ञापन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अमेरिका ने अपनी डाइट दिशानिर्देश अपडेट किए और लोगों से पैकेटबंद उत्पादों के बजाय ताजे और कम प्रोसेस्ड फूड को प्राथमिकता देने की सलाह दी. यह भी पढ़ें: बच्चों के जन्म के समय शरीर पर क्यों होता है जन्मदाग, इसको लेकर डॉक्टर्स क्या बताते हैं? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
आजकल हम में से बहुत लोग पैकेटबंद और तैयार खाने वाले उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. ये खाने में सुविधाजनक होते हैं और आसानी से उपलब्ध भी होते हैं, लेकिन हाल ही में हुए बड़े शोध से पता चला है कि कुछ फूड आइटम्स में यूज होने वाले कुछ सामान्य प्रिजर्वेटिव्स यानी रासायनिक संरक्षक हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. फ्रांस में किए गए और ब्रिटिश मेडिकल जर्नल और नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित दो बड़े अध्ययनों में 2009 से 2023 के बीच 1 लाख से ज्यादा वयस्कों के डाइट और स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया. यह अध्ययन न्यूट्रीनेट-सैंट समूह के तहत किया गया था और इसका मकसद यह समझना था कि लंबे समय तक इन प्रिजर्वेटिव्स का सेवन करने से कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है या नहीं.
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स क्या हैं?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स वे होते हैं जो फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं. इनमें आमतौर पर बहुत ज्यादा चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट्स होती है, जबकि जरूरी पोषक तत्व जैसे विटामिन और मिनरल्स बहुत कम होते हैं. इन प्रोडक्ट में अक्सर प्रिजर्वेटिव्स, इमल्सीफायर और स्टेबिलाइजर जैसे एडिटिव्स भी शामिल होते हैं. ये ऐसे रसायन हैं जो सामान्य घर के खाने में शायद ही यूज होते हैं.
शोध से क्या मिला?
शोध में 17 आम प्रिजर्वेटिव्स की जांच की गई, जिनमें पोटेशियम सॉर्बेट, सोडियम नाइट्राइट और एसीटिक एसिड जैसे पदार्थ शामिल हैं. ये सभी भारत में बिकने वाले पैकेटबंद फूड में आमतौर पर पाए जाते हैं. पोटेशियम सॉर्बेट का ज्यादा सेवन करने पर समग्र कैंसर का खतरा 14 प्रतिशत और स्तन कैंसर का खतरा 26 प्रतिशत बढ़ सकता है. सल्फाइट्स समग्र कैंसर का खतरा 12 प्रतिशत बढ़ा. सोडियम नाइट्राइट से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 32 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. पोटैशियम नाइट्रेट और एसीटिक एसिड का सेवन समग्र कैंसर और स्तन कैंसर से जुड़ा.
हालांकि शोधकर्ताओं ने साफ किया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन प्रिजर्वेटिव्स का सेवन सीधे तौर पर कैंसर का कारण है. इसके लिए और गहन अध्ययन की जरूरत है.लेकिन यह जरूर माना गया कि ये रसायन शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ा सकते हैं और आंत के माइक्रोबायोटा को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे कैंसर और अन्य रोगों का खतरा बढ़ सकता है.
भारतीय प्रिजर्वेटिव्स
भारत में पैकेटबंद फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये निष्कर्ष इस बात को और पुष्ट करते हैं कि आधुनिक डाइट पैटर्न, जो ज्यादातर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने पर आधारित है, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. विशेषज्ञ का कहना है कि इन परिणामों के आधार पर तुरंत नियामक समीक्षा और जनता में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. उनका कहना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पहले ही मेटाबॉलिज्म और मानसिक विकारों, असमय मृत्यु समेत लगभग 32 स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े पाए जा चुके हैं.
कैसे नुकसान पहुंचाते हैं प्रिजर्वेटिव्स?
फूड आइटम्स में प्रिजर्वेटिव्स मुख्य रूप से उन्हें खराब होने से रोकने और उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए मिलाए जाते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये खाने की प्राकृतिक संरचना को भी प्रभावित कर सकते हैं.जब यह संरचना खराब हो जाती है, तो स्वस्थ पोषक तत्व भी हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं. कई प्रिजर्वेटिव्स लंबे समय तक शरीर में कई स्तर की सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और आंत के माइक्रोबायोटा में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं.
क्या किया जा सकता है?
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि नियामकों को प्रिजर्वेटिव्स के यूज पर कड़ी निगरानी और नियम बनाने चाहिए. तब तक, उपभोक्ताओं को जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड फूड लेने की सलाह दी जाती है. दुनिया के कई देशों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर नीतिगत कार्रवाई शुरू हो चुकी है. ब्रिटेन में बच्चों की सुरक्षा के लिए टीवी और ऑनलाइन विज्ञापन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अमेरिका ने अपनी डाइट दिशानिर्देश अपडेट किए और लोगों से पैकेटबंद उत्पादों के बजाय ताजे और कम प्रोसेस्ड फूड को प्राथमिकता देने की सलाह दी.
यह भी पढ़ें: बच्चों के जन्म के समय शरीर पर क्यों होता है जन्मदाग, इसको लेकर डॉक्टर्स क्या बताते हैं?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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