इजरायल-ईरान टकराव से गहराया तेल संकट? भारत ने कसी ली कमर, बैकअप प्लान तैयार; जानिए डिटेल

India Backup Plan for Oil Supply Crisis: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक माहौल को अस्थिर कर दिया है. इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई पर गंभीर असर की आशंका पैदा हो गई है.  ऐसे में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ना लाजमी है. भारत समते दूसरे देशों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे माहौल में भारत के पास कौन से दूसरे विकल्प मौजूद है और आगे की रणनीति कैसी रहने वाली है? आइए जानते हैं, इस बारे में..... क्रूड ऑयल की कीमतों में लगेगी आग? विषय की समझ रखने वाले जानकारों का कहना हैं कि, इस बार ईरान और इजरायल के बीच पैदा हुए इस संघर्ष का दायरा पिछले विवादों की तुलना में अधिक बड़ा है. जिसके कारण यह युद्ध लंबा चलने की बात भी सामने आ रही है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों पर इसका प्रभाव पड़ेगा. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया है. पूरी दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है.  रास्ता बंद होने से सप्लाई में कमी होगी, जिससे कीमतों आसमान छू सकती है. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा  सकता है कि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 73 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंच कर बंद हुआ था. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबे समय तक चलता है तो कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंच सकती है.  संकट से निपटने के लिए भारत का बैकअप प्लान संभावित सप्लाई में आने वाली कमी को देखते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है. जानकारों के मुताबिक आकस्मिक हालात से निपटने के लिए कंटिन्जेंसी प्लान पर तेजी से काम किया जा रहा है. भारत की प्लानिंग यह है कि तेल की लोडिंग उन बंदरगाहों से की जाए जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं हैं. इसके लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के वैकल्पिक पोर्ट्स के इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है. साथ ही खाड़ी क्षेत्र से बाहर के तेल उत्पादक देशों को अतिरिक्त ऑर्डर देने की योजना भी बनाई जा रही है. ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो और देश किसी भी आपात स्थिति से निपटने में पूरी तरह से सक्षम बना रहे. भारत की ईरान पर निर्भरता  दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तेल ठिकाने पर हमला होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ता है. साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा की उम्मीद भी बनी रहती है. होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए एक जरूरी व्यापारिक रास्ता है. देश के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40 प्रतिशत और लिक्विफाइड नेचुरल गैस  (एलएनजी) का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से पहुंचता है. ऐसे में भारत के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार रखना बेहद जरूरी है. क्योंकि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए देश बहुत बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है.   यह भी पढ़ें: ईरान-इजरायल तनाव के बीच विदेशी निवेशकों की चाल, क्या फरवरी में 22,615 करोड़ की खरीदारी के बाद बदलेगा रुख? जानें डिटेल

Mar 1, 2026 - 18:30
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इजरायल-ईरान टकराव से गहराया तेल संकट? भारत ने कसी ली कमर, बैकअप प्लान तैयार; जानिए डिटेल

India Backup Plan for Oil Supply Crisis: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक माहौल को अस्थिर कर दिया है. इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई पर गंभीर असर की आशंका पैदा हो गई है. 

ऐसे में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ना लाजमी है. भारत समते दूसरे देशों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे माहौल में भारत के पास कौन से दूसरे विकल्प मौजूद है और आगे की रणनीति कैसी रहने वाली है? आइए जानते हैं, इस बारे में.....

क्रूड ऑयल की कीमतों में लगेगी आग?

विषय की समझ रखने वाले जानकारों का कहना हैं कि, इस बार ईरान और इजरायल के बीच पैदा हुए इस संघर्ष का दायरा पिछले विवादों की तुलना में अधिक बड़ा है. जिसके कारण यह युद्ध लंबा चलने की बात भी सामने आ रही है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों पर इसका प्रभाव पड़ेगा. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया है. पूरी दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. 

रास्ता बंद होने से सप्लाई में कमी होगी, जिससे कीमतों आसमान छू सकती है. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा  सकता है कि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 73 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंच कर बंद हुआ था. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबे समय तक चलता है तो कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंच सकती है. 

संकट से निपटने के लिए भारत का बैकअप प्लान

संभावित सप्लाई में आने वाली कमी को देखते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है. जानकारों के मुताबिक आकस्मिक हालात से निपटने के लिए कंटिन्जेंसी प्लान पर तेजी से काम किया जा रहा है. भारत की प्लानिंग यह है कि तेल की लोडिंग उन बंदरगाहों से की जाए जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं हैं.

इसके लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के वैकल्पिक पोर्ट्स के इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है. साथ ही खाड़ी क्षेत्र से बाहर के तेल उत्पादक देशों को अतिरिक्त ऑर्डर देने की योजना भी बनाई जा रही है. ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो और देश किसी भी आपात स्थिति से निपटने में पूरी तरह से सक्षम बना रहे.

भारत की ईरान पर निर्भरता 

दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तेल ठिकाने पर हमला होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ता है. साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा की उम्मीद भी बनी रहती है. होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए एक जरूरी व्यापारिक रास्ता है.

देश के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40 प्रतिशत और लिक्विफाइड नेचुरल गैस  (एलएनजी) का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से पहुंचता है. ऐसे में भारत के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार रखना बेहद जरूरी है. क्योंकि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए देश बहुत बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है.  

यह भी पढ़ें: ईरान-इजरायल तनाव के बीच विदेशी निवेशकों की चाल, क्या फरवरी में 22,615 करोड़ की खरीदारी के बाद बदलेगा रुख? जानें डिटेल

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